सागर के पार सागर

लाजवाब कृष्ण

पुरुषोत्तम ही कृष्ण का अतिक्रमण, और व्याख्या से कृष्ण ही पुरुषोत्तम, अर्थ कृष्ण के अतिक्रमण पर जो असीत्व वो भी कृष्ण।

यावानर्थ उदपाने सर्वत: सम्प्लुतोदके |
तावान सर्वेशु कृष्णेषु पुरूषोत्तमस्य विजानत:।।

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